औचक

जब भी,
निस्तेज आँखें
और,
सूखे होठ लिए
बोझिल टांगों वाला इंसान जागता है

उसी वक्त,
ठीक उसी वक्त,,,,,
छन्न से टूटता है आदमी !!
-----रवि

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