साहित्य दर्शन
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एकदिन वृद्ध कवि से मुलाकात हुई
कुछेक गोष्ठियों की चर्चाओं पर बात हुई
अचानक तरी उनकी तन गयी
बातों की झरी थी जो झर गयी
वाकया कहने लगे वे दम साधकर
आँखे फट पड़ी मेरी यह जानकर
बूढ़ी टाँगों ने साथ दिया न जब चलने में
कीचड़ से सन गए वे सम्भलने में
लदफदाते, हाँफते गन्तव्य को वे चल दिए
पीड़ाओं को भूल, फिर साँस लिए चल दिए
काव्य पाठ सहित सम्मान मिलने का जोर था
युव-युवियों से चकमक आयोजन का होड़ था
आयोजक की नजर ज्यों ही इन पर पड़ी
तिरछी नजरों से बोला "गिरीश जी" कितनी बजाई घड़ी
जाइये जल्दी से जाइए, होइए तैयार आप
सहानुभूति की बात न हुई,इनका आना हो पाप
कवि की बूढ़ी आँखों में क्षोभ था और रोष था
दिल में कहीं न कहीं सम्मान का भी जोश था
तनिक रुके वे साँस लिए फिर वे कहने लगे
समारोह की सच बयानी धीरे से ढहने लगे
खास लोगों के लिए, ए.सी. कमरे समर्पण हुए
मुझ जैसों को तकिए में, साहित्य के दर्शन हुए
©रवि कुमार "रवि"
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एकदिन वृद्ध कवि से मुलाकात हुई
कुछेक गोष्ठियों की चर्चाओं पर बात हुई
अचानक तरी उनकी तन गयी
बातों की झरी थी जो झर गयी
वाकया कहने लगे वे दम साधकर
आँखे फट पड़ी मेरी यह जानकर
बूढ़ी टाँगों ने साथ दिया न जब चलने में
कीचड़ से सन गए वे सम्भलने में
लदफदाते, हाँफते गन्तव्य को वे चल दिए
पीड़ाओं को भूल, फिर साँस लिए चल दिए
काव्य पाठ सहित सम्मान मिलने का जोर था
युव-युवियों से चकमक आयोजन का होड़ था
आयोजक की नजर ज्यों ही इन पर पड़ी
तिरछी नजरों से बोला "गिरीश जी" कितनी बजाई घड़ी
जाइये जल्दी से जाइए, होइए तैयार आप
सहानुभूति की बात न हुई,इनका आना हो पाप
कवि की बूढ़ी आँखों में क्षोभ था और रोष था
दिल में कहीं न कहीं सम्मान का भी जोश था
तनिक रुके वे साँस लिए फिर वे कहने लगे
समारोह की सच बयानी धीरे से ढहने लगे
खास लोगों के लिए, ए.सी. कमरे समर्पण हुए
मुझ जैसों को तकिए में, साहित्य के दर्शन हुए
©रवि कुमार "रवि"
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