अभिमन्यु मरा नहीं
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अक्सर!
एक मोड़ आता है
व्यूहनुमा

और आदमी
इसमें उलझा हुआ
व्यूह भेदने के तरीके खोजता है

सनद रहे,
समय की चाक पर घूमता हर आदमी
अभिमन्यु है
वह मरा नहीं
ले रहा है साँसे
तुझमें
और मुझमें..!!

©रवि कुमार "रवि"

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