कविता

लेखकों/कवियों से-----
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दुनिया की नजरों में
पेट सबसे अहम मुद्दा है
और उससे भी अहम् है पेट को ढोते रहना
अगर आप लिखते हो तो लिखो
खूब लिखो
पर सनद रहे--
आप पेट और भूख की परिभाषा मत गढ़ना
क्योंकि यह एक जटिल मुद्दा है,
आप खो जाओगे इसमें !
भूख खौलती है पेट के भीतर ही भीतर
और आप हैं कि भूख को महज भूख लिखते हैं....
कल देखा था,
उस काले कलूटे छोकरे को
आँतों के संग पिचके हुए पेट को लेकर
इस नुक्कड़ से उस नुक्कड़ तक दौड़ रहा था
शायद,
भूखा था वह !
और उसे पता है भूख की भाषा,
भूख की तड़प
उसका खदकना
खदकते भूख की तड़प में
सनका हुआ वह छोरा
लगा रहा था बोली
उन पन्नों की,
जिस पर भूख लिखा था आपने
10 रूपये किलो
सुन रहे हो न आप
हाँ, 10 रूपये किलो ...!!
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©रवि कुमार "रवि"

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